अध्यात्म ज्योतिष दर्शन

Sincere efforts in Astrology.Is it a Science or Superstition. Astrological Signs,Planets and Nakshatras. Astrology Compatibility. Research work in "Jyotish" as a specific subject. Relation between "Jyotish and Bhagya"

Breaking

Friday, April 13, 2018

April 13, 2018

KXIP vs RCB "IPL 2018 - ASTROLOGICAL ANALYSIS'

                                                                                          KXIP  vs    RCB
                                                                     IPL 2018    ASTROLOGICAL ANALYSIS
                                                                                         KP ASTROLOGY
             
                जब KP ASTROLOGY "कृष्णमूर्ति पद्धति" की नक्षत्रीय ज्योतिष प्रणाली में जीत और हार के प्रश्न पर विचार किया गया है तो दो नियमों का विशिष्टता से उल्लेख किया गया है.
   
                प्रथम तो यह की जीत व हार के विषय में एकादश स्थान योगदान निर्विवाद है.अतः जीत के प्रश्न में एकादश स्थान अर्थात ELEVENTH HOUSE  का SUBLORD या उपाधिपति यदि वक्री "RETROGADE" होता है तो तब तक जीत नहीं होती है जब तक की वह मार्गी "DIRECT" नहीं हो जाता है.

               द्वितीय यह कि यदि जीत को शासित करने वाले एकादश स्थान का SUBLORD  वक्री ग्रह के नक्षत्र में हो तो जीत नहीं होगी ऐसा ही कहना पड़ेगा , अर्थात्  इसे पक्का नियम माना गया है .

              अनुभव के आधार पर मैं  इसमें एक उपनियम को और शामिल कर लेता हूँ,क्योंकि इसे नज़रअंदाज़ करने का खामियाजा कई बार भुगत चुका हूँ. वह उपनियम यह है कि यदि एकादश स्थान का SUBLORD वक्री न हो और ना ही वो किसी वक्री ग्रह के नक्षत्र में हो लेकिन यदि वह जिस ग्रह के SUB में स्थित है वह यदि वक्री है तो विजय प्राप्त नहीं होती है .

       आज का मैच जो KINGS XI PUNJAB "KXIP" और  ROYAL CHALLENGERS BANGLORE "RCB" के बीच होने जा रहा है उसमें दोनों ही टीम के छठे और एकादश का सम्बन्ध एक दुसरे के एकादश से बना हुआ है अर्थात् मैच अंत तक चलेगा और हार या जीत को अंत तक तौल पाना काफी मुश्किल होगा फिर भी अंतिम  क्षणों में पंजाब को भाग्य का कुछ साथ मिलना चाहिए.

KP ASTROLOGY के SUBLORD SYSTEM को समझने के लिए अलग से लिखने का प्रयास करूँगा.
जय गणेश.

April 13, 2018

"KP ASTROLOGY"

"KP ASTROLOGY"
"THE ASTROLOGICAL DIAMOND - FOUNDER OF KRISHNAMURTI PADDHATI "
                                          कर्मों की व्याख्या 

       कृष्णमूर्ति पद्धति के बारे में बात करने से पहले मैं बात करना चाहूँगा कर्म के सिद्धांत के बारे में जिसका उल्लेख प्रो. के. एस. कृष्णमूर्ति जी  ने अपनी पुस्तक "FUNDAMENTAL PRINCIPLES OF ASTROLOGY" में किया है!क्योंकि चाहे जीवन हो ज्योतिष ये सब कर्म ही तो हैं जो इनका निर्धारण करते हैं !जीवन और ज्योतिष में कर्मों के सम्बन्ध और महत्त्व को समझने लिए ही कर्मों के सिद्धांत को पहले समझना आवश्यक सा देख पड़ता है !कृष्णमूर्ति जी ने अपनी पुस्तक में में कर्मों की तीन श्रेणियों का जिक्र किया है ! 
1. दृढ़ कर्म       
2. दृढ़ दृढ़ कर्म          
3. अदृढ़ कर्म 
1. दृढ़ कर्म:- कर्म की इस श्रेणी में उन कर्मों को रखा गया है जिनको प्रकृति  के नियमानुसार माफ नहीं किया जा सकता !जैसे क़त्ल,गरीबों को उनकी मजदूरी न देना,बूढ़े माँ - बाप को खाना न देना ये सब कुछ ऐसे कर्म हैं जिनको माफ नहीं किया जा सकता ! ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में चाहे कितने ही शांति के उपाय करे लेकिन उसका कोई भी प्रत्युत्तर उन्हें देख नहीं पड़ता है ,चाहे ऐसे व्यक्ति इस जीवन में कितने ही सात्विक जीवन को जीने वाले  हों लेकिन उनको जीवन कष्टमय ही गुजरना पड़ता है वे अपने जीवन के दुखों को दूर करने के लिए विभिन्न ज्योतिषीय उपाय करते देखे जाते हैं लेकिन अंत में हारकर उन्हें यही कहने के लिए मजबूर होना पड़ता है,कि ज्योतिष और उपाय सब कुछ निरर्थक है ,लेकिन ये बात तो एक सच्चा ज्योतिषी ही  जानता है कि क्यों यह व्यक्ति कष्टमय जीवन व्यतीत करने को  बाध्य है !
2.दृढ़ अदृढ़ कर्म:-कर्म की इस श्रेणी में जो कर्म आते है उनकी शांति उपायों के द्वारा की जा सकती है अर्थात ये माफ किये जाने योग्य कर्म होते हैं !जैसे कोई  व्यक्ति कोलकाता जाने लिए टिकट लेता है परन्तु भूलवश मुम्बई जाने वाली ट्रेन में बैठ जाता है !ऐसी स्थिति में टिकट चेक करने वाला कर्मचारी पेनल्टी के पश्चात उस व्यक्ति को सही ट्रेन में जाने की अनुमति दे देता है !ऐसे वैसे व्यक्ति सदैव ज्योतिष और इसके उपायों की तरफदारी करते नजर आते हैं !
3. अदृढ़ कर्म:-(नगण्य अपराध) ये वे कर्म होते हैं जो एक बुरे विचार के रूप में शुरू होते हैं और कार्य रूप में परिणत होने से पूर्व ही विचार के रूप में स्वतः खत्म हो जाते हैं ! जैसे एक लड़का आम के बाग को देखता है और उसका मन होता है ,कि बाग से आम तोड़कर ले आये लेकिन तभी उसकी नजर रखवाली कर रहे माली पर पड़ती है और वह चुपचाप आगे निकल जाता है !यहाँ बुरे विचारों का वैचारिक अंत हो जाता है अतः ये नगण्य अपराध की श्रेणी में आते हैं और थोड़े बहुत साधारण शांति - कर्मों के द्वारा इनकी शांति हो जाती है ! ऐसे व्यक्ति ज्योतिष के विरोध में तो नहीं दिखते लेकिन इसके ज्यादा पक्षधर भी नहीं होते !
           ज्योतिष का एक जिज्ञासु विद्यार्थी होने के नाते कहना चाहूँगा कि सभी को अपनी दिनचर्या में साधारण पूजन कार्य और मंदिर जाने को अवश्य शामिल करना चाहिए क्योंकि ये आदत पता नहीं कितने ही  अदृढ़ कर्मों से जाने - अनजाने में छुटकारा दिला देती है !कर्म और भाग्य के विषय में इसी श्रृंखला के आगामी लेख में कर्म और भाग्य के रहस्य का पूर्ण सत्य विवरण प्रस्तुत करने का प्रयत्न करूँगा !
---------------------------------------------------------------------------------------------------------
      

Thursday, April 12, 2018

April 12, 2018

IPL - 2018 "MI VS SRH" - ASTROLOGY ANALYSIS

                                                 IPL - 2018   ASTROLOGY ANALYSIS
                                    MUMBAI INDIANS  VS  SUNRISERS HYDERABAD


        सामान्यतया ज्योतिष में जातक की कुण्डली के विश्लेषण को आधार मानते हुए तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव को जिन्हें संस्कृत में "त्रिशदायेश' कहा जाता है अच्छा नहीं माना गया है. ज्योतिष के सिद्धांतों में तीसरे से पापी छठे को और छठे से पापी एकादश को माना गया है.
        बात जब हार और जीत की होती है तो जातक कुंडली विश्लेषण में पापी कहे जाने वाले ये तीनों भाव बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं . कैसे ?   आइये देखते हैं -

THIRD HOUSE "तृतीय भाव"-  यह भाव पराक्रम से सम्बंधित है और किसी भी मैच में जीतने के लिए जिस वस्तु की सर्वाधिक आवश्यकता होती है वह है "पराक्रम"

SIXTH HOUSE "छठा भाव"- छठा भाव विरोधी के लिए हानि का भाव है और विरोधी को हानि अर्थात स्वयं को लाभ.

ELEVENTH HOUSE "ग्यारहवां भाव"- यह भाव स्वयं की विजय से सम्बंधित है जो कि सर्वाधिक महवपूर्ण है .

           यदि पराक्रम भाव का सम्बन्ध स्वयं की विजय से और शत्रु की पराजय से हो तो विजय निश्चित है.
               "बाजीराव की तलवार और 3,6,11 के सम्बन्ध से होने वाली विजय पर संदेह नहीं करते"

    अर्थात् तीसरे भाव का छठे व ग्यारहवें भाव से सम्बन्ध बनता हो तो उस टीम की जीत होती है और यदि तीसरे भाव का सम्बन्ध दुसरे पांचवे से बनता हो तो पराजय . यहाँ तक तो ठीक है लेकिन जब दोनों ही ओर ऐसे सम्बन्ध ना बने तो फिर गहन विश्लेषण की आवश्यकता होती है और जहां तक IPL के MATCH की बात करें तो ये मैच इतने नजदीकी होते हैं कि ज़रा सी  चूक निर्णय को प्रभावित कर सकती हैआज होने वाला मैच भी बहुत ही संघर्षपूर्ण होगा ऐसा गणना से प्रतीत हो रहा है लेकिन अंत में पलड़ा कुछ मुंबई की ओर झुकेगा ऐसा अनुमान है.

      अनुभव जन्य एक नियम की बात और करना चाहूँगा कि जब गणना के द्वारा कोई निर्णय निकाला जाए और वह मैच वर्षा या अन्य कारणों से बाधित होकर कुछ छोटा हो जाता है या उस मैच के OVER  कम कर दिए जाते हैं, तो फिर ज्योतिषीय गणना से प्राप्त निर्णय सही नहीं ठहरता है ऐसा अनुभव है.
    

Saturday, April 7, 2018

April 07, 2018

VIVO IPL 2018 - Astrological View

         IPL के शुरू होते ही जैसे रोज शाम को  कोई मेला लगता हो मोहल्ले की पान-दुकान पर.खेल की अंतिम गेंद तक चलने वाला रोमांच लोगों को खींच लाता है टेलीविजन के आगे.भारत और अन्य  देशों की टीमों के मध्य मैच तो बहुत देखे पर भारत के अन्दर ही बनी टीमें जिसमें विश्व स्तर के सभी खिलाडी एक दुसरे के विरुद्ध या साथ खेलते हुए देखना एक अलग ही रोमांच उत्पन्न करता है.
       
      किसी भी खेल में यदि जीत और हार का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विश्लेषण करें तो कुछ एक ऐसे तरीके हैं जिससे ज्योतिष का अभ्यास करने वाले लोग ये जानने का प्रयत्न करते पाए जाते हैं कि आज कौन सी टीम की विजय होगी.आइये इन तरीकों के बारे में और इनमें उपस्थित त्रुटियों के बारे में भी जान लेते हैं जिसके कारण इन तरीकों से प्राप्त निष्कर्ष सदैव सही नहीं पाए जाते.
     
        प्रथम प्रकार में ज्योतिष के अभ्यासक उस स्थान विशेष की उस समय की कुंडली बनातेहैं जिस समय मैच शुरू होता है और इस कुंडली से निष्कर्ष बताते हैं, अब इस विधि में समस्या यह है,कि कुंडली में प्रथम भाव से एक टीम व दूसरी टीम को सप्तम भाव से देखा जाता है. अब यहाँ प्रश्न यह उठता है की किस टीम को लग्न माना जाए और किस को सप्तम. अपने - अपने तर्क हैं कि बल्लेबाजी करने वाली टीम को लग्न मानना चाहिए और गेंदबाजी करने वाली टीम को सप्तम. जब इस आधार पर किये गए फलादेश ठीक होते हैं तब तो ठीक लेकिन जब फलादेश बिलकुल विपरीत जा बैठता है, तो एक विचार उत्पन्न होता है,"कहीं उल्टा तो नहीं है"

     द्वितीय प्रकार में ज्योतिष अभ्यासक टीम के नाम से बनने  वाली राशि का मैच वाले  दिन के गोचर के चंद्रमा और मैच के समय चलने वाले लग्न के आधार पर तालमेल बिठाकर ये जानने का प्रयत्न करते हैं कि कौन जीतेगा. ये तरीका तो तार्किक रूप से ठीक प्रतीत होता है लेकिन मैच इतने करीबी होते हैं,कि जब किसी को भी अंतिम गेंद तक पता नहीं चलता की कौन जीतने वाला है तो ज्योतिष अभ्यासक के लिए इस सूक्ष्म बिंदु को कुंडली में पकड़ पाना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है और फलादेश भी विपरीत जा बैठता है.

     तृतीय प्रकार में कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) की Horary Astrology (प्रश्न ज्योतिष) शाखा में अभ्यास करने वाले अभ्यासक आते हैं जो प्रश्न पूछे जाने के समय को आधार मानकर उसकी कुंडली बनाते हैं और उस आधार पर ये बताने का प्रयत्न करते है की कौन जीतेगा. किसकी जीत होगी यह बताने के लिए ज्योतिष के कुछ सिद्धांतों का पालन किया जाता है, जो तार्किक रूप से सही हैं.यह प्रक्रिया सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है,लेकिन इसमें जो बात सबसे महत्वपूर्ण मानी गयी है वो यह है कि:-
      प्रश्न वास्तविक होना चाहिए जैसे यदि आपसे किसी ने प्रश्न किया कि आज कौन सी टीम जीतेगी और आपको पता नहीं है आज किसका मैच है ओ आपके लिए प्रश्न स्पष्ट ही नहीं हुआ है.यहाँ यदि पूछने वाला किसी टीम का नाम लेकर पूछता है कि आज फलां टीम मैच जीतेगी क्या तो आप उस टीम को लग्न और दूसरी टीम को सप्तम मानकर अपनी गणना कर सकते हैं.
     यदि आप स्वयं ये जानना चाहते हैं कि आज कौन सी  टीम जीतेगी और आपके सामने यही समस्या है कि किस टीम को लग्न माना जाए. इसके दो सामान्य तरीके हो सकते हैं पहला तो यह की मैच की लिस्ट में जिस टीम का नाम पहले हो उसे लग्न मान लिया जाए और दूसरा यह की आप दोनों टीमों के नाम की पर्चियां बना लें और फिर उसमें से एक पर्ची उठाये,उस पर्ची पर जिस टीम का नाम हो उसे लग्न मानकर गणना की जा सकती है.
    वास्तविक जिज्ञासा होने पर ही प्रश्न का सही उत्तर प्राप्त होता है,यदि कोई रोज रोज ऐसे ही आजमाने के लिए या सट्टा लगाने के लिए किसी भी पद्धति का प्रयोग करता है,तो ज्योतिष व ज्योतिषी दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है.अगले लेख में तीनों पद्धतियों को उदाहरण से समझाने का प्रयत्न करूंगा.

VIVO INDIAN PREMIER LEAGUE 2018 में खेलने वाली टीमें उनके कप्तानों,खिलाड़ियों व मालिकों को शुभकामनाएं.

CHENNAI SUPER KINGS   -  MAHENDRA SINGH DHONI
DELHI DAREDEVILS          - GAUTAM GAMBHIR
KINGS XI PUNJAB               - RAVICHANDRAN ASHWIN
KLKATA KNIGHT RIDERS - DINESH KARTIK
MUMBAI INDIANS              - ROHIT SHARMA
RAJASTHAN ROYALS         - AJINKYA RAHANE
ROYAL CHALLENGERS     - VIRAT KOHLI
BANGLORE
SUNRISERS HYDERABAD - KANE WILLIAMSON

Friday, April 6, 2018

April 06, 2018

सलमान खान - जन्म कुंडली विश्लेषण (CASE IN JODHPUR HIGH - COURT)

नाम :- सलमान खान
जन्म दिनांक :- 27 दिसंबर 1965
जन्म समय :- 2:30 pm
जन्म स्थान :- इंदौर
जन्म डाटा साभार astrosage.com

दिए गए जन्म समय के आधार पर सलमान खान की कुंडली मेष लग्न और कुम्भ राशि की बनती है जो नीचे  दी गयी है
                     लग्न का स्वामी मंगल दशम में मकर राशि में है, जो शुक्र के साथ है. इसे अग्नि (मंगल) व रसायन (शुक्र) का योग तथा पुरुष (मंगल) व स्त्री (शुक्र) का योग भी कहा गया है . भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम की कुण्डली  में भी मंगल व शुक्र की युति है, जो अग्नि व रसायन के प्रभाव के कारण उन्हें मिसाइल - मैन बना गयी.
        केंद्र के चार घर  व्यक्तित्व पर पूर्ण प्रभाव रखते हैं और इन चार घरों में केवल मंगल व शुक्र स्थित हैं जिनमें से एक लग्न का व दूसरा सप्तम का स्वामी है,अब देखा जाए तो सलमान के बारे में जब भी विचार हो तो जो बात प्रमुखता से होती है वह उनके सुगठित शरीर और उसका प्रदर्शन तथा उनके जीवन में आने वाली महिलाएं अर्थात उनके जीवन में इन दो ग्रहों का प्रभाव पूर्ण रूप से दृष्टिगोचर हो रहा है.अन्य कोई विशेष बात जिनसे उनकी छवि बनती हो तो जरूर बताएँ.

                      सलमान खान को लेकर यदि वर्तमान सन्दर्भ में यदि बात करें तो जो बातें देखने को मिलती है वो प्रस्तुत  हैं -

 शनि व चन्द्रमा की युति जीवन में विषाद उत्पन्न करती है. इनकी कुण्डली  में यह युति एकादश भाव में बनी हुई है, जो जीवन में ऐसी घटनाओं की सृष्टि करवाती है जिनसे जीवन में विषाद बना रहे और मन व्याकुल रहे, इसमें जो बात ठीक है वो यह की इस युति पर गुरु की दृष्टि है और गुरु की दृष्टि को अमृत के सामान माना गया है अतः शनि चन्द्र की युति से बनने  वाले "विष - योग" को गुरु की अमृत वर्षा संतुलित कर रही है.
      यह इनकी कुंडली का स्थाई योग है अतः ये स्थितियां आजीवन चलती रहेगी.
वर्तमान में सलमान खान को शनि की दशा में राहु की अंतरदशा  चल रही है, और ज्योतिष की विंशोत्तरी दशा पद्धति में कुछ दशा व अन्तर्दशा के क्रम को बहुत ही अशुभ माना गया है जिनमें सबसे प्रमुख है शनि व राहु.
          साधु (शनि) के गले में सर्प(राहु) से उत्पन्न  होने वाले श्राप की तुलना इस ग्रह योग से की गयी है और इसका निराकरण भी एक साधु द्वारा ही किया जाता है. अतः यदि सलमान खान किसी साधु की शरण में जाकर पश्चाताप करे और इश्वर के ध्यान के मार्ग में कम से काम सात दिन बिताये तो इस अन्तर्दशा के दुष्परिणामों को कुछ कम किया जा सकता है.मेरा तो यही सुझाव है.
        फिर कभी सलमान की कुंडली का पूर्ण विश्लेषण पस्तुत करने का प्रयत्न करूंगा.




Sunday, March 25, 2018

March 25, 2018

THE SUN : DO'S AND DONT'S सूर्य : क्या करें और क्या नहीं

Image result for सूर्य और आदतें जब जब भी ज्योतिष की बात होती है तो सदैव ही हम ज्योतिषीय उपचार व उनके महत्व के बारे में चर्चा करते हैं. क्या कभी हमने सोचा है कि दैनिक जीवन में हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्य,आराधना या कहें तो हमारी आदतें भी हमारी ग्रह स्थिति के अनुकूल हो तो हमें उन ग्रहों का शुभ परिणाम प्राप्त होता है.सामान्य पद्धति से हटकर आज मैं चर्चा करूंगा कि अपने दैनिक जीवन में किन आदतों में सुधार करके और कौन से कार्य नित्य अपनी जीवनशैली में सम्मिलित करके हम अपने ग्रह योगो के शुभ परिणाम को प्राप्त कर सकते हैं और अशुभ परिणामों में कमी कर सकते हैं.

हम इन आदतों को ज्योतिषीय उपचारों की श्रेणी में रख सकते हैं. ये आदतें ज्योतिषीय योगों के साइड इफेक्ट को या बुरे परिणामों को कम कर शुभ परिणामों में वृद्धि करती है. विभिन्न ग्रहों को आधार मानते हुए इस श्रृंखला को नौ अलग अलग लेखों द्वारा समझाने का प्रयत्न किया जाएगा कि किन योगों में हमें अपने जीवन में किन आदतों को शामिल करना चाहिए और किन आदतों को त्याग देना चाहिए.इस लेख में हम सूर्य के उपाय,आराधना के बारे में चर्चा करेंगे.

सूर्य (THE SUN)

सूर्य यदि प्रथम भाव का स्वामी हो या प्रथम भाव में स्थित हो तो :- ऐसे व्यक्तियों को सदैव स्वावलंबी और निश्चित दिनचर्या वाला होना चाहिए तथा दिन में कुछ न कुछ कार्य मेहनत का अवश्य करना चाहिए. सुबह देरी से उठना इन के लिए घातक हो सकता है.

सूर्य यदि द्वितीय भाव का स्वामी हो या द्वितीय भाव में स्थित हो तो:- ऐसे व्यक्तियों को हमेशा परिवार में जब भी जिम्मेदारी का काम हो तो उसे पूरा करना चाहिए. पिता द्वारा बताए गए आदेशों की कभी अवज्ञा नहीं करनी चाहिए व उस कार्य को पूरा करना चाहिए.

सूर्य यदि तृतीय भाव का स्वामी हो या तृतीय भाव में स्थित हो तो:- ऐसे व्यक्तियों को सदैव बिना डरे सत्य बोलना चाहिए. झूठ बोलना इस योग के बुरे परिणामों की ओर ले जाता है. सही को सही व गलत को गलत कहने का सामर्थ्य रखना चाहिए. किसी स्वजन के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए.

सूर्य यदि चतुर्थ भाव का स्वामी हो या चतुर्थ भाव में स्थित हो तो :- ऐसे व्यक्तियों को सदैव विद्याध्ययन में मेहनती रहना चाहिए तथा जब कभी खेतों में जाने का अवसर प्राप्त हो तो वहां अवश्य जाना चाहिए. माँ की सेवा करनी चाहिए.

सूर्य यदि पंचम भाव में हो या पंचम भाव का स्वामी हो तो:-ऐसे व्यक्तियों को अपने भोजन करने का समय निश्चित रखना चाहिए तथा ऐसी-वैसी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए.

सूर्य यदि छठे भाव का स्वामी हो या छठे भाव में स्थित हो तो:- ऐसे व्यक्तियों को अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए. एक ही विषय पर लगातार चिंता करते रहने से दिल की बीमारी होने का भय बना रहता है तथा भोजन सदैव भूख से कम ही करना चाहिए
                       
                                   

सूर्य यदि सप्तम भाव का स्वामी हो या सप्तम भाव में स्थित हो तो:- ऐसे व्यक्तियों को किसी भी सरकारी विभाग से या सरकारी विभागों के कर्मचारियों से नहीं उलझना चाहिए.जहां तक हो सके सरकारी नियमों का पालन करना चाहिए तथा सरकारी टैक्स आदि का भुगतान समय पर सही मात्रा में करते रहना चाहिए. स्त्रियों से कभी शत्रुता नहीं करनी चाहिए तथा पत्नी के स्वास्थ्य का सदैव ध्यान रखना चाहिए.

सूर्य यदि अष्टम भाव का स्वामी हो या अष्टम भाव में स्थित हो तो;- ऐसे व्यक्तियों को हमेशा अपने पिता से कुछ दूरी बनाकर रखनी चाहिए जैसे सोने का कमरा दोनों का अलग हो, भोजन का समय दोनों का अलग हो इत्यादि .पिता के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आदर में कोई कमी ना हो बल्कि यह दूरी केवल भौतिक रूप से हो ताकि दोनों के स्वास्थ्य व कारोबार के लिए हितकर रहे. स्त्रियों को अपने नियमित चक्र को लेकर सजग रहना चाहिए तथा किसी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए.

सूर्य यदि नवम भाव का स्वामी हो या नवम भाव में स्थित हो तो:-ऐसे व्यक्तियों को पिता को पिता के रूप में व गुरु के रूप में भी सम्मान प्रदान करना चाहिए. माता के कुल अर्थात मामा-मामी से संबंध सदैव मधुर रहे ऐसा प्रयास करना चाहिए.

सूर्य यदि दशम भाव का स्वामी हो या दशम भाव में स्थित हो तो:- ऐसे व्यक्तियों को अपने कार्य समय में सदैव ही ईमानदारी से कार्य करना चाहिए. कर्म योग ही इन्हें ऊंचाई पर ले जाता है तथा कर्म से किसी प्रकार की चोरी करना इनके लिए नुकसानप्रद होता है.

सूर्य यदि एकादश भाव का स्वामी हो या यहां स्थित हो तो:- ऐसे व्यक्तियों को सदैव यह प्रयास करना चाहिए कि उनकी संतान को अच्छे संस्कार दिए जाएं. महिलाएं अपनी गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान रखें.

सूर्य यदि द्वादश भाव का स्वामी हो या द्वादश भाव में स्थित हो तो;- ऐसे व्यक्तियों को सदैव अपने विश्वस्त अनुचरों पर भी ध्यान रखना चाहिए तथा अपने बंधुओं से लड़ाई ना हो इस बात का ख्याल रखना जाना चाहिए.इसके अलावा यदि संभव हो तो सरकारी अस्पतालों में जहां तक हो सके किसी न किसी प्रकार का सहयोग करते रहना चाहिए.

सूर्य की मूल प्रवृत्ति समस्त जंतु जगत और वनस्पति जगत के जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा का निर्माण करना और इस उर्जा को वहां तक संप्रेषित करना है. इस कार्य में नियमितता सूर्य की सबसे बड़ी विशेषता है अतः यदि हमें सूर्य के शुभ प्रभावों को प्राप्त करना है तो तो त्याग की प्रवृत्ति को अपनाना चाहिए सदैव ही कुछ देने का प्रयत्न करना चाहिए जो हम दे सकें. इसके अलावा नियमित रहने से भी सूर्य के अशुभ प्रभाव में कमी होती है तथा शुभ परिणाम अधिक प्राप्त होता है.सूर्य के चक्र के हिसाब से यदि दिनचर्या को रखा जाए तो आरोग्य की प्राप्ति होती है क्योंकि सूर्य आरोग्य का भी कारक है .

अगले लेख में चंद्रमा को केंद्र में रखकर इस विषय पर विचार करेंगे कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं जिससे हमें चंद्र के अशुभ प्रभाव कम होकर शुभ प्रभाव अधिक प्राप्त होते रहे.

जय गणेश

Friday, March 23, 2018

March 23, 2018

GEMINI-ZODIAC SIGN "मिथुन राशि"

                  राशि चक्र की तीसरी राशि मिथुन है जिस पर बुध का स्वामित्व माना गया है. यह वायु तत्व की प्रथम राशि है इसके स्वामी बुध को बुद्धिमतापूर्ण ग्रह माना गया है. इस राशि में कोई भी ग्रह उच्च या नीच का नहीं होता. वायु तत्व राशि होने के कारण ये  लोग स्मृतियों में रहते हैं जैसे अपने जमाने की बातें सोचना और अक्सर लोगों या परिवारजनों के समक्ष उनका वर्णन करना. कल्पनाशीलता अधिक होती है और यह परिवर्तन को पसंद करने वाले होते हैं.
             
                       मिथुन राशि नैसर्गिक कुंडली चक्र में है तृतीय भाव में पडती है, अतः इस राशि को पराक्रम  का प्रतीक भी माना जाता है. संघर्ष करने में ये लोग  अधिक सक्षम होते हैं.

                                     बालकों के विषय में बात की जाए तो मिथुन राशि के बालक काफी चपल व चंचल होते हैं. इनका शारीरिक विकास शुरुआत में इतना अधिक नहीं हो पाता है. इनकी हंसी वृषभ की मधुर मुस्कान से कुछ अलग चंचलता लिए हुए होती है तथा सदैव ही कुछ ना कुछ करते रहने कि इनकी प्रवृत्ति मेष  से ज़रा  हटकर होती है. मिथुन के प्रतीक में भी दो बालकों का चित्र होता है. प्राचीन संकेतों में में इन्हें भाई बहन अथवा जुडवा बताया गया है.

                               यह द्विस्वभाव राशि है और इसके स्वामी बुध की प्रकृति भी द्वैत होती है. यह गुण मिथुन राशि पर स्पष्ट रुप से दिखाई देता है. चंचलता इनका स्थाई भाव है तथा किसी एक कार्य को करने से पहले दूसरे कार्यों को अपने हाथ में ले लेना और भी कार्य पूरा नहीं कर पाना यह इस राशि का स्वभाव होता है. बुध के स्वामित्व, वायु तत्व और नैसर्गिक कुंडली में तृतीय स्थान पर पड़ने के कारण इस राशि को कम्युनिकेशन की राशि भी कहा गया है. विभिन्न समूहों में आपस में वार्तालाप को सुचारू करने का काम इस राशि के द्वारा ही किया जाता है. द्विस्वभाव होना इस राशि को एक से अधिक कार्य करने की योग्यता भी प्रदान करता है तथा नए माहौल में स्वयं को ढालने की क्षमता भी प्रदान करता है. विपरीत परिस्थितियों में साहस बटोरकर दृढ़ता से संघर्षरत रहना मिथुन राशि का बहुत बड़ा गुण होता है.

                                      सूक्ष्मदर्शी राशि होने के कारण ये  लोग स्थितियों का सूक्ष्म परीक्षण करते  है. इनकी बुद्धि तर्कसम्मत और स्पष्ट होती है. ये  केवल कंठस्थ विषयों को दोहराने का काम नहीं करते बल्कि मानसिक गुणों के आधार पर श्रेष्ठता को प्राप्त करने का प्रयास करते  है. मिथुन के जातक परिवर्तनशील होते हैं तथा अपनी शक्तियों को विस्तारित करने के साथ-साथ अपने कर्मों का विस्तार अलग-अलग विषयों पर करते रहते हैं. बुध द्वारा शासित होने के कारण इनकी जिज्ञासा बहुत अधिक होती है तथा यह अलग-अलग तथ्यों को खोजने का प्रयास करते रहते हैं ,और प्रत्येक विषय में गहराई तक जा कर हर बात का पता लगाते हैं जैसे कि वह उस विषय पर कोई अनुसंधान कर रहे हो. ये  एक श्रेष्ठ पत्रकार या योजना बनाने वाले भी हो सकते हैं. इन्हें तथ्यों को याद रखने में भी कोई दिक्कत नहीं होती, हां यह अवश्य है कि वह किसी एक विषय पर एकाग्र नहीं हो पाते ,उनके विचारों का फैलाव बहुत बड़ा होता है.
                                                            Image result for मिथुन राशि
                               ये लोग  प्रश्न पूछने से कभी हिचकते नहीं है और तब तक प्रश्न या प्रयास करते रहते हैं जब तक कि उन्हें किसी विषय विशेष के बारे में स्पष्ट विचार प्राप्त ना हो जाए और ये  उसे पूरी तरह समझ न लें. संवाद इस राशि का एक महत्वपूर्ण गुण होता है. दो या दो से अधिक व्यक्ति पास- पास बैठकर कुछ देर के बाद चुप हो जाते हैं लेकिन उनमें यदि कोई एक मिथुन का हो तो चुप्पी के स्थान पर संवाद में निरंतरता बनी रहती है यह इनका नैसर्गिक गुण होता है. संवाद के साथ साथ हास्य पर भी इस राशि का स्वामित्व होता है. जीवन की  हर छोटी मोटी घटनाओं में हास्य ढूंढ लेना और लोगों को हंसाना मिथुन राशि की नैसर्गिक प्रवृत्ति होती है.

                                इस राशि में बुध के स्वामित्व के कारण कुछ बचपना पाया जाता है, जिसे समय-समय पर देखा जा सकता है. यदि ये  अपने जीवन में एकाग्रता और धैर्य  को अपना लें तो जिस तरह से ये किसी कार्य को पूरा कर सकते हैं उस का मुकाबला कोई भी नहीं कर सकता.
                                 कद काठी के विषय में बात की जाए तो मिथुन राशि लंबा और सीधा शरीर देती है इनके हाथ लंबे व पैर पतले होते हैं. इनका रंग सामान्य गेहूंआ  होता है तथा सामान्यतया इनकी ठोड़ी पर एक निशान बना होता है.
                          बुध को संदेशवाहक भी कहा गया है तथा वायु तत्व राशि होने के कारण मिथुन राशि के जातक दूत कर्म का निर्वाह करने में निपुण होते हैं. दूसरे के मन की बात को समझते हैं तथा सदैव मीठी बातें ही किया करते हैं. ये  लोग अध्ययनशील होते हैं तथा इनकी रूचि प्रकृति के रहस्य व रहस्यमय विषयों की ओर भी होती है. बुध को रिपोर्टर कहा गया है तथा वायु ध्वनि के प्रसार का माध्यम है अतः ये  लोग समाचार पत्र, न्यूज़ एजेंसी, रेडियो आदि विभागों में काम करते हुए मिल जाते हैं. सामान्यतया ये  लोग जो कार्य करते हैं उनमें छोटी यात्राओं से जुड़े कारोबार, शिक्षा, लेखन, मुद्रण, प्रकाशन, तार विभाग, टेलीफोन, गणित, एजेंसी जैसे कार्य होते हैं.
             
                                इन्हें गुप्त प्रेम संबंधों के द्वारा कई बार भारी  नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. धनार्जन के प्रति ये  लोग सदैव सजग रहते हैं तथा मूल कार्य के अलावा भी प्रयासरत रहते हैं, कि उन्हें अधिक धन की प्राप्ति हो सके. जैसे कई लोग अपनी नौकरी के अलावा ट्यूशन पढ़ाने का काम कर सकते हैं ,कुछ कार्यालय का काम घर पर लाकर करते हैं ,कोई ओवरटाइम या कुछ ना कुछ ऐसा जिससे निश्चित आय में बढ़ोतरी की जा सके प्रयास में लगे रहते हैं .मिथुन राशि वाले जल्दी से मित्रता करने में समर्थ होते  है और गलती ढूंढने में भी. ये लोग  बंध कर नहीं रहना चाहते बल्कि विभिन्नता को पसंद करते हैं.

                                मिथुन राशि फेफड़ों को सूचित करती है अतः हवा के द्वारा होने वाली बीमारियां जैसे सर्दी जुकाम, सांस की बीमारी इत्यादि इन्हें होने की संभावना अधिक होती है.
                                       विशेष रूप से कहा जाए तो संवाद और हास्य इनके जीवन के दो स्तंभ होते हैं तथा ऐसे जातक आपको किसी न किसी ऐसे कार्य में संलग्न दिख  जाएंगे जो कभी समाप्त होने वाला नहीं है, पर ये  हार नहीं मानते धैर्य और साहस के साथ लगे रहते हैं.
अध्यात्म ज्योतिष दर्शन . Powered by Blogger.