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Saturday, September 17, 2011

नक्षत्र


नक्षत्र : अश्विनी

: नक्षत्र :

एक स्थान से दुसरे स्थान पर पृथ्वी के अयन चलने के कारण खिसकते प्रतीत होने वाले तारामंडलों का नाम नक्षत्र है!तैत्तिरीय संहिता में कहा गया है सृष्टि सर्वत्र जल में रहने पर सृष्टि की शुरुआत में जो तर गए वे तारे हैं!
                                                                           1. अश्विनी 
अश्विनी नक्षत्र का वैदिक नाम अश्वयुज है!अश्विनी नक्षत्र में कुल तीन तारे होते हैं,जो आपस में मिलकर घोड़े के मुख जैसी आकृति का निर्माण करते हैं!
अश्विनी नक्षत्र का मालिक अश्विनी कुमार है,और ग्रहों में इस नक्षत्र का मालिक है केतु !यह क्षिप्र नक्षत्र है,अतः इसमें खरीद-बेच,यात्रारम्भ,विद्यारंभ किया जा सकता है!तिर्यक मुख नक्षत्र होने के कारण जलयात्रा,विमान यात्रा,मशीनरी चालू करना आदि कार्य किये जा सकते हैं!चैत्र मास में अश्विनी नक्षत्र को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका प्रभाव शून्य होता है!मंगलवार को अश्विनी नक्षत्र होने पर अमृतसिद्धि और रविवार को अश्विनी नक्षत्र होने पर सर्वार्थसिद्धि नक्षत्र का योग करता है!रविवार को अश्विनी नक्षत्र आनंद योग का निर्माण करता है!अपवादस्वरूप अमृतसिद्धि योग यदि सप्तमी तिथी को पड़े तो विष का निर्माण करता है,अर्थात त्याज्य है!अश्विनी नक्षत्र गंडांत संज्ञक होता है इसकी शुरुआत की दो घड़ी अर्थात 48 मिनट गंडांत होते हैं!परन्तु रविवार को अश्विनी नक्षत्र में जन्म होने पर गंडांत का दोष काफी हद तक कम हो जाता है!अश्विनी नक्षत्र के लिए केले,आक व धतूरे के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए!अश्विनी नक्षत्र पुरुष संज्ञक और मरीचि गोत्र का होता है!पञ्च तत्वों में इसका तत्व पृथ्वी है!यह नक्षत्र-पुरुष के सर का अधिष्ठाता होता है!इस नक्षत्र की योनी अश्व,नाड़ी आद्या और गण देव होता है!
कारकत्व:-घोड़ों से सम्बंधित लोग,आधुनिक काल के हिसाब से वाहनों से सम्बंधित लोग!सेनापति,शरीर की चिकित्सा करने वाले चिकित्सक!अधीनस्थता में काम करने वाले लोग!रूपाजीवी अर्थात सुंदरता से धन कमाने वाले लोग!कृषि कर्म करने वाले !

नक्षत्रफल:-सुरूप चमकयुक्त बड़ी आँखें!आकर्षक उभारयुक्त ललाट,कार्यदक्ष,बुद्धिमान,अच्छी नीरोग शक्ति वाला,बातों से प्रभावित करने वाला होता है!दृढ़ निश्चय या यूं कहें की अड़ियलपन इनकी खास पहचान होती है!
पदार्थ:-चावल,घी,अनाज,कपडा,घास,चारा,जड़ी-बूटियाँ,केमिकल आदि!
व्यक्ति:-घोड़ों के व्यापारी,प्रशिक्षक,घुडदौड कराने वाले,वाहन उद्योग से सम्बंधित लोग,चिकित्सक,कर्मचारी वर्ग,विज्ञापन की दुनिया से जुड़े लोग!
अश्विनी नक्षत्र का वैदिक मंत्र:- "अश्विना तेजसाचक्षु: प्रIणेन सरस्वतीवीर्यम् ! वाचेंद्रो बलेनेंद्रा यदद्युरिन्द्रयम्"
बीमारियाँ:-सर में चोट,दुर्बलता,मिर्गी,सर के आधे भाग में दर्द,मूर्छा,असाधारण नींद,पक्षाघात,मलेरिया,छोटी चेचक!
मानसिक गुण:-भाईयों से मतभेद,विवेक शून्य,हनुमान जी की पूजा,लोभी,भूमि के लिए चिंतित!
व्यवसाय:-पुलिस,सेना,चिकित्सा,रेलवे,मशीनरी,लोहा,घुडसवार,जेल,अदालत,कारखाना!

Friday, June 3, 2011

MONEY WITH शनि (SATURN)



                       विज्ञानं ज्योतिष और दर्शन को मिलाने के बाद इस छोटी पोस्ट को लिखने का मन बनाया है !शनि के बारे में विस्तार से चर्चा तो किसी आगामी लेख में  करेंगे लेकिन यहाँ शनि और MONEY (धन)के बारे में एक विचार मन में प्रस्फुटित हुआ उसी को यहाँ लिखने का प्रयास कर रहा हूँ ! आशा है विधु पाठकगण सार ग्रहण करने का प्रयास करेंगे ! शनि ग्रह  की  एक विशेषता यह भी होती है , कि वह सोखने या आकर्षित करने का गुण रखता है !जैसे यहाँ देखें :-
१ . भैंस सूर्य के ताप को अत्यधिक सोखती है !
२ .पूर्णतया शनि से प्रभावित साधू स्वतः आकर्षण का कारक  होता है !
३ .विज्ञान में भी सूर्य के ताप और प्रकाश का पूर्ण अवशोषण करने के लिए  काले रंग का इस्तेमाल किया जाता है !" भौतिक विज्ञान की आदर्श क्रिश्निका  "इसका अच्छा उदहारण है !
४ . एक साधारण कहावत का उदहारण भी यहाँ देना चाहूँगा जो हम लोग अक्सर कहा करते है "इसकी आँखों में शनि है " क्यों करते है या नहीं !
  अतः कहा जा सकता है , कि शनि की स्थिति आपके लिए श्रेष्ठ है तो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं !अब ये शनि श्रेष्ठ है या नहीं और अगर नहीं तो क्या करें की यह अच्छी स्थिति में आ जाये इसकी चर्चा अगले लेखों में की जायेगी ! सभी ग्रहों का विस्तार से वर्णन मेरे मुख पृष्ठ के पास " ज्योतिष योग संग्रह " वाले पेज पर करूँगा !जिज्ञासु पाठक वहाँ देख सकते हैं !
     मेरे लेख ज्योतिष के जिज्ञासू विद्यार्थियों के साथ - साथ सभी साधारण लोगों के लिए उपयोगी हो सके इसलिए मुख पृष्ठ पर हमेशा साधारण जीवन और ज्योतिष , अध्यात्म और दर्शन का मिलाजुला लेख लिखने का प्रयास करता हूँ !  ज्योतिषी लोग  "ज्योतिष योग संग्रह " पृष्ठ पर अधिक जानकारी के लिए देख सकते हैं !
आज का टिप :- शनि की दशा,या दुसरे प्रभाव युक्त समय में प्रतिदिन २ से ३ किलोमीटर की पैदल यात्रा अवश्य करनी चाहिए !इससे शनि का  SIDE - EFFECT  खत्म हो जाता है !
! जय गणेश ! 
!! जय जय गणेश !!